गुरुवार, अक्तूबर 21, 2010

शूली पर भगवान

आस पास व्यापत कई चीजे आहत करते रहती है ये व्यथा कविता बनकर पन्नो पर उतर आती है

शूली पर भगवान
कुछ गाओं गुनगुनाओं एक कविता सुनाओ
देश पर ,समाज पर,
लाश ,सरकटी के फैले व्यापार पर
सत्ता गहते लोगो के लोलुप अधिकार पर या
राजनीती में फैले---डूबे आकंठ भ्रष्टाचार पर .......
सुनाओ किसने उतारी ये गाँधी जी की धोती
चश्मे और डंडे की कैसी लगी बोली ??
खादी और खाकी के रहते
नंगे होते बापू पर
बोलो तुम कुछ कह पाओगे???
या गोडसे बनकर के तुम भी बन्दूक चलाओगे????

कलम भी हुई कमीन अब
लोकतंत्र हुई गमगीन अब
बंधक बन गए लोकतंत्र पर
क्या कविता कोई गाओगे ???
या मेज़ थपथपाकर संसद में
कौरव की सरकार बनौगे ???
संसद में ताकत के दम पर
जीत रहे बेईमान है ....
नाज़ नाक को ताक पर रखकर
बेच रहे हिंदुस्तान है ....
इन चोरो को नंगा कर दे
क्या ऐसी कविता गाओउगे ????
आज गांवों में फैला सन्नाटा
दुश्मन बनकर भाई ने लुटा
जात धर्म के परदे में
हमने राम -रहीम को लुटा
जनतंत्र है बनी बेचारन
बंधक बनकर खादी की .
बंधन से ये मुक्त हो जाये
क्या ऐसी कविता गाओगे ????
हिंसा के दलदल में डूबा
लोकतंत्र शर्मशार है
व्यभिचारो की मंडी में
नित होता नया व्यापार है
कब तक युही लटकाओगे ??
शूली पर भगवान को........
कलयुग का रावण मर जाये
क्या ऐसी कविता गौओगे ????
नेताओं के इस नगरी में
धूर्तो का बोलबाला है
कपटी काटे फसल झूठ की
कंस यहाँ रखवाला है
मिले कंस से त्राण हमें
क्या ऐसी कविता गौओगे ?????
क्या ऐसी कविता सुनौगे ?????

2 टिप्‍पणियां:

  1. kavita shabd kranti laakar aur vicharon ko yatharth ki bhoomi par karyanvit kar ,
    traan dila sakti hai visangatiyon se paripoorna dhara ko...
    vyathit hriday ke udgaar pranamya hain!

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  2. Kavita vastav main bahuut acchi hai. Aapne swatantra bharat ki tasvir rakhi ha. ye system ke prati ek krati lane ke liye kafi hai. Aapko dher sara shadhuwad.

    Meri Dilli tammanna hai ki isi kavita ko aage badate huy aap is system ko, swatantra bharat ko vastava mai swatantra banane ke liye samadhan ke tour per ek aur kavita likhe.

    Bahut bahoot sadhuvaad!!!!!!!!!

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